Fraud : 10 लाख से ज्यादा की धोखाधड़ी, इंश्योरेंस कंपनी की महिला कर्मचारी गिरफ्तार

सूद लाइफ इंश्योरेंस कंपनी इसकी पूरी जांच करेगी कि यह घटना कैसे घटी। लेकिन ग्राहकों की शिकायत थी कि वे बैंक ऑफ इंडिया गए और बीमा कराया। उनके लिए यह जानना संभव नहीं है कि कौन बैंक कर्मचारी है और कौन बीमा कर्मचारी है।

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Jagganath Mondal
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Fraud in the name of insurance

टोनी आलम, एएनएम न्यूज : सरकारी बैंक बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) पर बीमा के नाम पर 10 लाख रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी का आरोप लगा है। जामुड़िया थाने की पुलिस ने सुध लाइफ इंश्योरेंस कंपनी (Sudh Life Insurance Company) की महुआ मुखर्जी नामक महिला कर्मचारी को गिरफ्तार किया है। घटना बैंक ऑफ इंडिया की जामुड़िया शाखा में हुई। आज दोपहर करीब 12 बजे ग्राहकों ने बैंक ऑफ इंडिया कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया। मामला गरमाने पर पुलिस गयी और महिला कर्मी व बैंक मैनेजर को थाने ले आयी। बीमा के लिए ग्राहकों ने कहा कि उन्होंने बैंक ऑफ इंडिया में बीमा करवाया था। वे जानते हैं कि यह बैंक ऑफ इंडिया का अपना बीमा है। मोटी रकम लेने के बाद उन्हें कच्चे कागज पर रसीद कॉपी दी जाती है। जब वे आकाश से पूछने गए तो उन्हें बार-बार लौटा दिया गया। वे आज बैंक गये और मामले की जानकारी ली. वहां जाकर देखा तो उनके जैसे करीब 200 से 300 ग्राहकों के साथ ठगी हुई है। जामुड़िया  शाखा बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंधक राजदीप डे ने कहा कि सूद लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के साथ उनका समझौता है। ऐसे में ग्राहकों को बीमा मुहैया कराया जाता है। लेकिन उन्हें शिकायत मिली है कि आरोपी महुआ मुखर्जी ने अपनी फर्जी रसीदें छपवाकर कई ग्राहकों से नकद पैसे लिए हैं। बैंक में जमा पैसा सुरक्षित है। लेकिन नकद में लेनदेन के लिए बैंक की कोई ज़िम्मेदारी नहीं है। 

वही, बीमा कंपनी सूद लाइफ इंश्योरेंस के वरिष्ठ अधिकारी तन्मय मुखर्जी ने कहा कि भारत के हर बैंक में उनके प्रतिनिधि हैं। लेकिन जिस तरह से उनकी प्रतिनिधि महुआ मुखर्जी ने ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी की है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जायेगी। महुआ मुखर्जी ने फर्जी रसीद और मुहर लगाकर ग्राहकों से 10 लाख से अधिक की रकम निकाल ली, जो कि पूरी तरह से बैंक नियमों से बाहर है। सूद लाइफ इंश्योरेंस कंपनी इसकी पूरी जांच करेगी कि यह घटना कैसे घटी। लेकिन ग्राहकों की शिकायत थी कि वे बैंक ऑफ इंडिया गए और बीमा कराया। उनके लिए यह जानना संभव नहीं है कि कौन बैंक कर्मचारी है और कौन बीमा कर्मचारी है। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि ऐसी संस्था के कर्मचारियों को बैंक के अंदर कार्यालय खोलने की अनुमति कैसे दी गई।