World Environment Day : ईसीएल के महानिदेशक ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

उन्होंने कहा कि हम लोग जाने अनजाने हर रोज पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। चाहे वह पानी की फिजूल खर्ची हो या फिर प्लास्टिक का इस्तेमाल। हम लोग ऐसे कार्यों से पर्यावरण को लगातार नुकसान पहुंचाते जा रहे हैं। 

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Jagganath Mondal
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Message of environmental protection

टोनी आलम, एएनएम न्यूज़ : ईसीएल के महानिदेशक समिरन दत्ता ने  विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर पौधा रौपण किया, साथ ही वायु गुणवत्ता स्टेशन का भी शुभारंभ किया। कुनुस्तोड़िया एरिया महाप्रबंधक कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में ईसीएल सीएमडी समीरन दत्ता ने कहा सिर्फ एक दिन पर्यावरण दिवस मनाने से नहीं चलेगा, हम लोग पर्यावरण की रक्षा की बात जब भी करते हैं हम लोग वृक्षारोपण के बारे में बात करते हैं। लेकिन पर्यावरण की रक्षा सिर्फ वृक्षारोपण से नहीं होगी हमें पर्यावरण संरक्षण के लिए और भी कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा कि हम लोग जाने अनजाने हर रोज पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। चाहे वह पानी की फिजूल खर्ची हो या फिर प्लास्टिक का इस्तेमाल। हम लोग ऐसे कार्यों से पर्यावरण को लगातार नुकसान पहुंचाते जा रहे हैं। 

समीरन दत्त ने कहा कि पाश्चात्य देशों में आजकल साइकिल के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। इसका मकसद ईंधन के खर्च को कम करना ताकि पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे। उन्होंने कहा कि आज भी हमारे देश में कम दूरी तक जाने के लिए भी लोग एसी गाड़ी का इस्तेमाल कर रहे हैं। हमें हमारी सोच बदलनी होगी और या तो साइकिल का इस्तेमाल बढ़ाना होगा या फिर पूल कार करना होगा। अगर कई लोग एक ही गंतव्य तक जा रहे हैं तो वह एक गाड़ी का इस्तेमाल कर सकते हैं जिससे कि अन्य गाड़ियों से होने वाले पर्यावरण के नुकसान को काम किया जा सके। उन्होंने बताया कि हाल ही में यह बात सामने आई है कि बंगाल और कोलकाता में वोल्वो बसों का इस्तेमाल लंदन से ज्यादा होता है, जो की बेहद खुशी की बात है। इसके बाद उन्होंने रेन वाटर, हार्वेस्टिंग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पानी की बचत करना और बारिश के पानी का फिर से इस्तेमाल करने की तकनीक का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है। धरती पर 30% ही जमीन है ऐसे में बढ़ती जनसंख्या के लिए भोजन का प्रबंध करना बहुत मुश्किल होता जा रहा है। इस वजह से हमें अपने प्राकृतिक संसाधनों का कुछ ऐसे इस्तेमाल करना होगा, ताकि हमारे आने वाली पीढ़ियां भी इन प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल कर सके।