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इलेक्टोरल बॉन्ड के नाम पर उनके मालिकों से पैसे लिए गए थे जिस वजह से आज यह सारी चीज महंगी हो गई है। बेरोजगारी चरम पर है लेकिन इसके बावजूद केंद्र या राज्य सरकार को कोई परवाह नहीं है।