मुम्बई पुलिस अधिकारी बन 9.50 लाख रुपयें की ठगी, बैंक के ब्रांच अधिकारी पर गंभीर आरोप

मामले की जाँच साइबर क्राइम पुलिस कर रही है। वही उन्होंने आरोप लगाया कि अगर समय पर आईसीआईसीआई बैंक के ब्रांच अधिकारी सहियोग करते तो उनका पैसा वापस आ सकता था या रोका जा सकता था। 

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Sneha Singh
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राहुल तिवारी, एएनएम न्यूज़: सालानपुर ईसीएल के लालगंज कार्यालय में कार्यरत एवं कल्याणपुर हाउसिंग निवासी अमित कुमार चोराशिया को साइबर अपराधियों ने मुम्बई पुलिस अधिकारी बन करीब 9.50 लाख रुपयों की ठगी का शिकार बनाया है। मामले को लेकर पीड़ित अमित कुमार चोराशिया ने ऑनलाइन साइबर क्राइम पोर्टल (एनसीआरपी) एवं आसनसोल साइबर क्राइम थाने में बीते 6 जून, को शिकायत दर्ज कराया है। मामले की जाँच साइबर क्राइम पुलिस कर रही है। वही उन्होंने आरोप लगाया कि अगर समय पर आईसीआईसीआई बैंक के ब्रांच अधिकारी सहियोग करते तो उनका पैसा वापस आ सकता था या रोका जा सकता था। 

अमित चोराशिया ने घटना के विषय में बताया कि बीते 5 जून बुधवार सुबह मुझे एक कॉल आया जिसमे मुझे बताया गया कि वह कुरियर कम्पनी की ओर से बोल रहा है और मेरे कुरियर पैकेज में कुछ अवैध व आपत्तिजनक वस्तु पाया गया है। जिसके खिलाफ मुम्बई पुलिस को शिकायत की गई है और मुम्बई पुलिस को आपका कॉल स्थांतरित किया जा रहा है, जिसके बाद कॉल पर मुम्बई पुलिस अधिकारी बन कोई मुझसे मेरे कुरियर संबंधित जानकारी ली और मुझे आगे की कार्यवाही के लिये मेरे फोन में एक स्काइपी एप्प डाउनलोड करवाया। एप्प के डाउनलोड करते ही मेरे फोन में बहुत सारे ओटीपी आने लगे इस दौरान डरते हुये मैंने कार्यवाही के नाम पर चल रहे ठगी में सहियोग करता गया। फोन काटने के बाद मेने SMS में देखा कि मेरे बैंक खाते से 9.50 लाख रुपयें आये और किसी अन्य बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया गया है। जिसके बाद मैनें पहले बैंक के ग्राहक सहायता नम्बर पर सम्पर्क किया जहाँ मुझे जानकारी मिली कि मेरे नाम पर 9.50 लाख रूपयों की लोन जारी किया गया है। मामले को लेकर मुझे तत्काल ब्रांच में सम्पर्क करने के लिए कहा गया। 

बीते 5 जून को ही मैं आईसीआईसीआई बैंक के आसनसोल अपकर गार्डेन ब्रांच पहुचा जहाँ शिकायत ब्रांच अधिकारी नहीं थे और मामले को तत्परता से नही लिया गया। अगले दिन भी मैं ब्रांच गया और मैने जब पूछा कि बिना मेरी जानकारी व अनुमति के इतनी बड़ी रकम की लोन दी गई तो उन्होंने ने कहा कि यह दिया गया लोन प्री-अप्रूव्ड लोन है जिसके लिये ज्यादा प्रोसेसिंग नही की जाती है। वही मामले में पीड़िता ने आरोप लगाया कि अगर आईसीआईसीआई बैंक के ब्रांच अधिकारी मामले को गंभीरता से लेते तो मेरे खाते से पैसों को जिन खातों में स्थानांतरित किया गया था उनको होल्ड किया जा सकता था। परन्तु बैंक के ब्रांच अधिकारी ने सहियोग नही किया। वही अमित कुमार चोराशिया ने बताया कि मैने कुछ दिनों पहले ऑनलाइन बुक का आर्डर दिया था। इसलिए पूरे मामले में वे शिकार हो गये।