Spiritual : जानिए सूर्यदेव को अर्घ्य देने की विधि और नियम

शास्त्र के अनुसार भगवान श्री सूर्यदेव (Lord Shri Suryadev) को सूर्यादय के समय ही अर्घ्य (Arghya) देना चाहिए। मान्यता है कि उगते हुए सूरज को जल देने से उनकी कृपा (Courtesy)प्राप्त होती हैं।

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Kalyani Mandal
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स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़ : शास्त्र के अनुसार भगवान श्री सूर्यदेव (Lord Shri Suryadev) को सूर्यादय के समय ही अर्घ्य (Arghya) देना चाहिए। मान्यता है कि उगते हुए सूरज को जल देने से उनकी कृपा (Courtesy)प्राप्त होती हैं। सूर्यदेव को हमेशा ही तांबे के पात्र (copper vessels) से ही जल अर्पित करना शुभ माना जाता हैं। जल चढ़ाते वक्त साधक का मुख हमेशा ही पूर्व (east) की ओर होना उत्तम दिशा बताया गया हैं। अगर आप भगवान सूर्यदेव को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो जल में रोली या लाल चंदन, लाल पुष्प मिलाकर ही भगवान को जल अर्पित करें। ऐसा करना शुभ माना जाता हैं। मान्यता है कि रोजाना भगवान श्री सूर्यदेव को अर्घ्य देने से शरीर में शक्ति बनी रहती हैं। साथ ही आत्मशुद्धि व बल की प्राप्ति होती हैं। मान सम्मान, तरक्की व अच्छी सेहत का आशीर्वाद भी मिलता हैं।