कैसे और किसकी मदद से चल रहा है बालू का काला साम्राज्य


28/09/2021 20:37:41 PM   Pawan Yadav         188






राहुल तिवारी, एएनएम न्यूज़, सालानपुर: किसी ने कभी सोचा था कि रेत भी सोने की कीमत पर बिक सकता है। अवैध रेत तस्करी पर आसनसोल दुर्गापुर पुलिस की कड़ी करवाई के बाद सालानपुर समेत पश्चिम बर्दवान के अन्य क्षेत्रों में बालू इन दिनों सोने के भाव बिक रहा है। निर्माण कार्य ठप्प है वही अगर आप 50 हजार की मोटी देने के लिए तैयार है तो ये शक्श आपको एक हाइवा रेत आपको उपलब्ध करा सकता है। पर कौन है यह शक्श जो आपदा में भी अवसर तलाश कर सोने की कीमत पर रेत मुहैया करवा रहा है। चोरी की रेत के खिलाफ प्रसासनिक शिकंजा कसने के बाद क्षेत्र में इन दिनों बालू माफिया सक्रिय भूमिका निभा रहे है, भले ही क्षेत्र के किसी भी नदी घाट से बालू नही उठ रही हो, ऐसे में झारखंड धनबाद के सिजुआ क्षेत्र से सालानपुर थाना क्षेत्र में रेत की तस्करी की जा रही है। सूत्रों की माने तो यह रेत धनबाद ज़िले से रॉयलटी देकर खरीद, चालान के दम पर झारखण्ड के मैथन या मिहिजाम भेज जा रहा है। वही अपनी मजबूत पकड़ और पहुँच का इस्तेमाल करके रेत तस्कर कल्यानेश्वरी और देंदुआ के फैक्टरियों को 50 हजार प्रति हाइवा बालू धड़ल्ले से उपलब्ध करा रहें है। जिससे प्रतिदिन राज्य सरकार को लाखों रुपए राजस्व का चूना लग रहा है।

डीबुडीह चेकपोस्ट पर तैनात कुल्टी ट्रैफिक जवानों ने हाल ही में एक रेत लदे हाइवा को जाँच के लिए रोका तो वाहन चालकों ने बताया कि उनके पास वैध चालान है और डंपर अंडरलोड है। हालांकि जाँच के बाद डंपर को छोड़ दिया गया। सूत्रों की माने तो सालानपुर थाना के 'पवन' नामक युवक रेत तस्करी का सरगना बताया जाता है, जो आज रेत की काली कमाई से अकूत संपत्ति का मालिक बन चुका है। सूत्र बतातें है कि पवन उधोगपतियों को डंके की चोट पर वैध बालू का हवाला देकर बालू बेचता है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि बालू वैध है तो रात के 2 बजे से सुबह 4 बजे तक ही क्यों रेत लदा डंपर को डीबुडीह बॉर्डर पास किया जाता है, इतना ही नही रात्रि 12 बजे से ही एक छोटी गाड़ी देंदुआ मोड़ से डीबुडीह चेकपोस्ट तक रेकी (पेट्रोलिंग) करती रहती है। बताया जाता है कि उक्त बालू तस्कर गिरोह द्वारा नकडाजोड़िया स्थित आसनसोल अलॉय के निकट एक स्टॉक यार्ड भी बनाया गया है, जिसकी भनक आज तक पुलिस को नही लग पाना कई सवालों खड़े करती है। स्थानीय जानकर बतातें है कि प्रशासन द्वारा जिन चीजों पर नकेल कसी गई उससे माफियाओं का ही जन्म हुआ है, बंगाल सरकार द्वारा जब आलू पर प्रतिबंध लगाया गया है तब इस डीबुडीह चेक पोस्ट ने यहाँ आलू माफिया को जन्म दिया था और अब बालू बंद होने से बालू माफिया ने जन्म ले लिया है।



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